ओडिशा की राजधानी क्या हैं | Capital Of Odisha
ओडिशा भारत का एक बड़ा राज्य है जिसके उत्तर दिशा में झारखंड,पश्चिम दिशा में छत्तीसगढ़ और बंगाल की खाड़ी मौजूद है।ओडिशा को देश की मंदिर बहुल राज्य माना जाता हैं। आज मुख्यतः ओडिशा का राजधानी क्या है इसके बारे में आपको अवगत कराएँगे। ओडिशा का राजधानी भुबनेश्वर है जो ओडिशा के मुख्य प्रशासनिक केंद्र स्थल है। भुबनेश्वर अपनी प्राकृतिक सौंदर्य,आईटी हब,स्टार्ट अप और पर्यटन के रूप में लोकप्रिय हैं। भुबनेश्वर एक महानगर है जिसमे आपको ओडिशा की सभी सहर में से वडे हैं।
भुबनेश्वर में आपको अधिकतर जगह पर आपको मंदिर और पर्यटन स्थल मिल जायेंगे। यह सहर ओडिशा की एक पर्यटन हब बन चूका है। इसमें बड़े बड़े मॉल,विस्वविद्यालय और रोड कनेक्टिविटी है जो सहर को अछे लुक देती है। भुबनेश्वर की जनसँख्या लगभग 12 लाख 26 हजार से ज्यादा हैं।
ओडिशा का असली भाषा ओडिआ है जो सुनने में सभी को अच्छा लगता है। हेलो दोस्तों,आज हम जानेंगे ओडिशा की राजधानी भुबनेश्वर सहर की हर वात।
ओडिशा की राजधानी क्या हैं | Capital Of Odisha
ओडिशा का राजधानी भुवनेश्वर है जिसकी मंदिर का राजधानी भी बुलाया जाता है।ओडिशा भारत की पूर्वी दिशा में स्थित एक राज्य हैं। ओडिशा को पहले/वर्तमान भी उत्कल के नाम पर बुलाया जाता है।"उत्कल" शब्द भारत के जातीय संगीत में है। क्षेत्रफल दॄष्टि से ओडिशा 8 वां सबसे बड़ा राज्य और जनसंख्या को देखाजाए तो 11 वां सबसे वडा राज्य हैं। ओडिशा का राजधानी भुबनेश्वर है जो खोर्धा जिला के अंतर्गत स्थित हैं।
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नाम |
भुबनेश्वर |
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क्षेत्रफल |
422 Km² |
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जनसंख्या |
12 लाख 26 हजार |
बर्तमान भुबनेश्वर आधुनिक सहर वनता जा रहा हैं लेकिन यह सहर की इतिहास में पहले हुई अनोखी घटना को स्मरण करा देती हैं। भुबनेश्वर को 1948 में गठन किया गया था। भुबनेश्वर में 6 वीं और 13 वीं शताब्दी में मंदिर की कारुकार्य किया गया जो तीनो धर्म यथा-हिन्दू,जैन और बौद्ध धर्म की छवि दिखती है।
भुवनेश्वर मुख्य तौर पर ओडिशा का वित्तीय राजधानी है। यहां की फल,सब्जियां,चाय और भारत का बड़ा मिल भी है।भुवनेश्वर में ज्यादातर उद्योग के कारण ओडिशा के अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है।
भुबनेश्वर की क्षेत्रफल और जनसंख्या
ओडिशा की राजधानी भुबनेश्वर पहले की तुलना में अब बड़ी होती जा रही हैं। भुबनेश्वर की क्षेत्रफल 422 वर्ग किलोमीटर हैं और जनसँख्या लगभग 12 लाख 26 हजार के करीव है। भुबनेश्वर की जनसंख्या क्रमागत तरीके से बृद्धि हो रही है।
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सहर |
भुबनेश्वर |
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जनसंख्या(2022) |
12 लाख 26 हजार |
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जनसंख्या(2018) |
11 लाख 31 हजार |
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जनसंख्या(2019) |
11 लाख 63 हजार |
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जनसंख्या(2020) |
12 लाख 26 हजार |
भुबनेश्वर के पास कटक सहर में ओडिशा के सबसे वडा नदी "महानदी" है। कटक पहले ओडिशा का राजधनी था। भुबनेश्वर सहर को खासतौर पर मंदिर मालीन सहर भी बोली जाती है। यह सहर में सबसे पौराणिक धरोहर जैसे लिंगराज मंदिर,खंडगिरि,उदयगिरि आपको मिल जायेंगे। भुबनेश्वर का नंदनकानन चिड़िआघर में सभी प्रकार जीवो को देखने बहुत दूर दूर से पर्यटक भ्रमण के लिए आते है।
भुबनेश्वर में ओडिशा के मुख्य भाषा ओड़िआ के आलावा हिंदी,इंग्लिश और अन्य भाषाए भी बोली जाती है। सहर में आपको हर जिले के हर सम्प्रदाय के लोग मौजूद हैं जो सहर को और खूबसूरत बना देती हैं।
ओडिशा के घूमने की स्थल
- हीराकुद डैम
- राजरानी मंदिर
- ब्रह्मेश्वर मंदिर
- मुक्तेश्वर मंदिर
- नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क
- राम मंदिर
- चौसठी जोगिनी मंदिर
- केदार गौरी मंदिर
- लिंगराज मंदिर
लिंगराज मंदिर
लिंगराज मंदिर एक शिव मंदिर है जो ओडिशा के राजधानी भुबनेश्वर के मध्य भाग में स्थित है। भगबान शिव की यह मंदिर को देखने के लिए दूर दूर से पर्यटक की परिदर्शन करते हैं। भुबनेश्वर में अधिकतर मंदिर हेतु इस सहर को मंदिर के नगरी भी कहा जाता हैं। शिव जी के यह मंदिर भारत की पौराणिक धरोहर हैं।
लिंगराज मंदिर की उचाई 180 फुट है। इस मंदिर को 10वीं शताब्दी में उस समय की राजा जजाती केशरी द्वारा शुरू किया गया था जो वाद में उनके पुत्र ललातेंदु केशरी ने 11वीं शताब्दी में पूरा किया था।
- लिंगराज मंदिर को भुबनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर कहा जाता है।
- एकाम्र क्षेत्र से बुलाया जाता है जिसकी अर्थ आम की पेड़ निचे शिवलिंग का उत्पन्न होना।
- लिंगराज मंदिर को मंदिर के ट्रस्टी बोर्ड और भारत सरकार के पुरातत्व बिभाग समीक्षा करता है।
- मंदिर के पास बिंदुसागर झील मौजूद हैं।
भुबनेश्वर सहर के जन समागम स्थान
- पटिआ छक
- बरमुंडा बस स्टैंड
- मास्टर कैंटीन छक
- बापूजी नगर
- शिशु भवन
- कल्पना स्क्वायर
- बानी बिहार
खंडगिरि और उदयगिरि पर्यटन स्थल
खंडगिरि का नाम खंडित पहाड़ के लिए बोलै जाता है और उदयगिरि को सूर्यादय के लिए जाना जाता हैं। यह दोनों पर्यटन स्थल भुबनेश्वर के पश्चिम में स्थित हैं। इस पहाड़ में आपको चारो तरफ कटा हुआ गुम्फा मिल जायेंगे जिसमे उस समय की जैन भिक्षु रहा करते थे।
इस दोनो धरोहर में 33 गुफाए है जिसमे खंडगिरि में 15 गुफाए और उदयगिरि में 18 गुफाए हैं। गुफाए में आपको बहुत सारा मूर्ति देखने को मिल जायेंगे। दोनों ऐतिहासिक धरोहर को उस समय की राजा खारावेल द्वारा बनाया गया था।
नंदनकानन चिड़िआ घर -Nandankanan Zological Park
नन्दनकानन का यह चिडयाघर भुबनेश्वर सहर के रघुनाथपुर में स्थित हैं। चिडयाघर में आपको सभी प्रकार जिव दृश्यमान हो जायेंगे यथा-अजगर,सफ़ेद बाघ,भारतीय पेंगोलिन,मगरमछ,शेर,हिरन और अदि हैं। ये मुख्य तौर पर एक प्राकृतिक जंगल के भीतर बनाया गया है। नंदनकानन का स्थापना 1960 में स्थापना किया गया था।
नंदनकानन का यह चिडयाघर 5000 वर्गफुट में फैला हुआ हैं जो चारोतरफ रंग बेरंग पेड़ और प्रकृति से भरा हुआ है जिसकी वजह से पर्यटक को आकर्षित हैं। इसमें आपको चारो तरफ घूमने के लिए ट्रैन की ब्यबस्था की गयी हैं जो इस चिड़ियाघर को और खूबसूरत बना देती है।


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